विचार · 12 जून 2026

सच्ची समृद्धि और हमारी नागरिक जिम्मेदारी

By · द्वारा

प्रमोद कुमार गोयल

Pramod Kumar Goel · Founder & Editor

12 June 2026

3 min read · लगभग 3 मिनट

Meerut, Uttar Pradesh

कुछ समय पहले ऐसी घटनाएँ चर्चा में आईं, जिनमें कुछ संपन्न लोगों पर सड़क किनारे रखे सरकारी गमले उठाकर ले जाने के आरोप लगे। यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इसने समाज के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा कर दिया — क्या केवल धनवान होना ही किसी व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बना देता है?

आमतौर पर माना जाता है कि शिक्षा और आर्थिक समृद्धि व्यक्ति को अधिक समझदार और अनुशासित बनाती है। फिर भी कई बार हम देखते हैं कि लोग सार्वजनिक स्थानों पर नियमों का पालन नहीं करते, पार्कों में कूड़ा फैला देते हैं, ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं या सार्वजनिक वस्तुओं का ध्यान नहीं रखते। इससे यह समझने का अवसर मिलता है कि अच्छी नागरिकता केवल धन या सुविधा से नहीं आती, बल्कि सोच और व्यवहार से विकसित होती है।

सार्वजनिक संपत्ति, जैसे सड़कें, पार्क, बसें, रेलवे स्टेशन, विद्यालय और सरकारी भवन, हम सभी की साझा धरोहर हैं। इन्हें बनाने और सँभालने में समाज का योगदान होता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक वस्तुओं को नुकसान पहुँचाता है या उनका गलत उपयोग करता है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।

समाजशास्त्री मानते हैं कि कभी-कभी अधिक सुविधा मिलने पर कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि उनके अधिकारों के साथ जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी होती हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने व्यवहार के बारे में सोचें और समझें कि छोटी-छोटी सावधानियाँ भी समाज को बेहतर बना सकती हैं।

उदाहरण के लिए, यदि हम सड़क पर कूड़ा न फैलाएँ, सार्वजनिक स्थानों को साफ रखें, यातायात नियमों का पालन करें और दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें, तो हम एक अच्छे नागरिक बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। इसी तरह यदि हम स्कूल, पार्क या पुस्तकालय जैसी जगहों को अपनी ही संपत्ति समझकर उनकी देखभाल करें, तो समाज अधिक व्यवस्थित और सुंदर बन सकता है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा हमें यह भी सिखाती है कि हम समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें। परिवार और विद्यालय बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, सहयोग और संवेदनशीलता जैसे गुण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आज भारत तेजी से विकास कर रहा है। नई सड़कें, आधुनिक शहर और बेहतर सुविधाएँ देश की प्रगति को दर्शाती हैं। लेकिन किसी भी देश की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब उसके नागरिक भी जिम्मेदारी और अनुशासन का परिचय दें।

इसलिए सच्ची समृद्धि केवल बड़े घर, महँगी गाड़ियाँ या आधुनिक सुविधाएँ नहीं हैं। सच्ची समृद्धि वह है, जिसमें व्यक्ति अपने समाज, अपने देश और सार्वजनिक संसाधनों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव रखे। जब नागरिक छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तभी एक मजबूत, स्वच्छ और जागरूक समाज का निर्माण होता है।

About the author

प्रमोद कुमार गोयल

Pramod Kumar Goel · Founder & Editor

पंजाब नेशनल बैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी, मेरठ निवासी। एक अनुभवी लेखक एवं संपादक, जिनकी रचनाएँ देश के अनेक प्रमुख समाचार-पत्रों एवं मीडिया मंचों पर प्रकाशित होती रही हैं।

Meerut, Uttar PradeshDecades in printEditor & columnist

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